Saturday, October 10

भारत जैसे-जैसे डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन वित्तीय लेनदेन में विस्तार कर रहा है, वैसे-वैसे स्पैम कॉल्स का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। टेलीकॉम कंपनियों की सख्ती के बावजूद स्पैम कॉल का खतरा कम होता नहीं दिख रहा है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने स्पैम कॉल को लेकर ताजा डेटा साझा किया है जो चौंकाने वाला है। साल 2023 में स्पैम कॉल्स से जुड़ी लगभग 13.62 लाख शिकायतें दर्ज की गई थीं, जो 2024 में बढ़कर 19.38 लाख और साल 2025 में छलांग लगाकर 31.09 लाख तक पहुंच गईं। यह लगातार बढ़ता ग्राफ हमारी डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था में सेंध को उजागर करता है। जालसाज अब केवल फोन नहीं कर रहे, बल्कि अत्याधुनिक रोबोटिक कॉलिंग और ऑटो-डायलर्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। फर्जी लोन ऑफर, क्रेडिट कार्ड प्रमोशन, लॉटरी और निवेश के लालच भरे जाल बिछाए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स की मानें, तो देश के 60% मोबाइल यूजर्स को रोजाना औसतन 2 से 3 स्पैम कॉल्स या मैसेज आते हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ये कॉल्स अक्सर सामान्य मोबाइल नंबरों जैसे दिखते हैं, जिससे आम आदमी आसानी से झांसे में आ जाता है।

AI से रोकथाम की कोशिश, लेकिन चुनौतियां बरकरार
इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए सरकार और टेलीकॉम कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का सहारा ले रही हैं। वर्तमान में, हर दिन लगभग 75 करोड़ स्पैम कॉल्स और मैसेज को यूजर्स तक पहुंचने से पहले ही ब्लॉक किया जा रहा है। मई 2025 के बाद लागू हुए कड़े नियमों के तहत अब तक 2.27 लाख से ज्यादा मोबाइल हैंडसेट ब्लॉक किए जा चुके हैं और 51 लाख से अधिक सख्त कार्रवाइयां की गई हैं। इसके अलावा हजारों SMS हेडर्स, टेम्पलेट्स और WhatsApp अकाउंट्स को भी बंद किया गया है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
सिर्फ तकनीक से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। यूजर्स को भी सतर्क रहने की जरूरत है। अनजान कॉल्स पर कभी भी बैंक डिटेल्स, OTP या निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। स्पैम कॉल्स के आने पर यूजर्स 1909 पर कॉल या SMS के जरिए शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके साथ ही फोन पर डू नॉट डिस्टर्ब (DND) सेवा भी एक्टिवेट कर सकते हैं। नियमों के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों को 7 दिन के भीतर कार्रवाई करनी होती है।

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