Friday, October 9

देश के सबसे भरोसेमंद कारोबारी घराने टाटा समूह के भीतर मची अंदरूनी कलह अब शेयर बाजार और निवेशकों के लिए चिंता का सबब बनती जा रही है। नमक से लेकर सॉफ्टवेयर और स्टील से लेकर एयरलाइंस तक फैले इस विशाल कारोबारी साम्राज्य में नेतृत्व और गवर्नेंस को लेकर उठापटक गहराती जा रही है। इसका सीधा और भारी नुकसान टाटा समूह की कंपनियों में निवेश करने वाले निवेशकों को उठाना पड़ा है। इस कॉर्पोरेट रस्साकशी के चलते महज 14 दिनों के भीतर निवेशकों के 1.53 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं। 17 सितंबर 2026 को टाटा समूह की 26 लिस्टेड कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 25.73 लाख करोड़ रुपये था। एक अक्तूबर तक यह घटकर 24.20 लाख करोड़ रह गया है। साफ है कि महज कुछ ही दिनों की इस उथल-पुथल में निवेशकों को करारा झटका लगा है। टाटा शेयरों में गिरावट ऐसे समय आई है, जब टाटा संस के बोर्ड ने 17 सितंबर को कंपनी की लिस्टिंग की तैयारी आगे बढ़ाने और चंद्रशेखरन को पांच साल का नया कार्यकाल देने का फैसला किया। इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स की ओर से टाटा संस के पुनर्गठन का प्रस्ताव आया। ट्रस्ट्स ने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को टाटा संस में मिलाने का प्रस्ताव दिया है। इससे टाटा संस की कारोबारी संरचना बदल सकती है और उसकी अनिवार्य लिस्टिंग का रास्ता प्रभावित हो सकता है। निवेशकों के लिए क्या अहम : एक्सिस डायरेक्ट के डिप्टी हेड फंडामेंटल रिसर्च उत्तम कुमार श्रीमल ने कहा, टाटा के शेयरों में उठापटक आगे भी बनी रह सकती है। निवेशकों को कॉरपोरेट घटनाक्रम के बजाय कंपनियों की कमाई, कारोबार की बुनियाद, नकदी प्रवाह और वैल्यूएशन पर ध्यान देना चाहिए। बाजार की नजर इस बात पर है कि टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर आगे क्या फैसला होता है और पुनर्गठन प्रस्ताव पर बोर्ड तथा आरबीआई का रुख क्या रहता है।

सबसे ज्यादा असर किन शेयरों पर
बीएसई आंकड़ों के मुताबिक, 17 सितंबर से 1 अक्तूबर के बीच टाटा एल्क्सी, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और वोल्टास जैसे शेयर सबसे अधिक दबाव में रहे। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के कारोबार और शेयरों  के भाव में गिरावट अलग-अलग रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शेयरों में गिरावट इस बात का संकेत है कि निवेशक गवर्नेंस, भविष्य की रणनीति और टाटा संस की संरचना को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता से सतर्क हो गए हैं। टाटा संस खुद बाजार में सूचीबद्ध नहीं है, इसलिए समूह के भीतर चल रहे विवाद का असर लिस्टेड कंपनियों के जरिये दिखाई देता है।

Share.
Exit mobile version