महाराष्ट्र विधान परिषद ने महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े एक अहम कानून को मंजूरी देकर सख्त रुख दिखाया है। एसिड अटैक पीड़ितों की पहचान पूरी तरह सुरक्षित रखने और ऑनलाइन यौन उत्पीड़न पर कड़ी सजा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। यह कानून ऐसे अपराधों पर रोक लगाने और पीड़ितों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह कानून महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को रोकने में मदद करेगा। इस कानून के तहत भारतीय न्याय संहिता (महाराष्ट्र संशोधन) विधेयक 2026 को सर्वसम्मति से पास किया गया। इससे पहले यह विधेयक विधानसभा से भी पारित हो चुका था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि 2020 में शक्ति बिल लाया गया था, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन बाद में इसे वापस भेज दिया गया। इसके बाद केंद्र सरकार ने नया कानून बनाया, जिसे भारतीय न्याय संहिता कहा जाता है और यह जुलाई 2024 से लागू है। सरकार ने एक समिति बनाई थी, जिसने जांच की कि शक्ति कानून के कौन-कौन से प्रावधान नए कानून में शामिल हैं। समिति की सिफारिश के बाद दो अहम बदलाव किए गए। पहला, एसिड अटैक पीड़ितों का नाम तक सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। इससे उनकी पहचान पूरी तरह सुरक्षित रहेगी। दूसरा, अब ईमेल, सोशल मीडिया जैसे डिजिटल माध्यम से किसी महिला को यौन प्रस्ताव देना अपराध माना जाएगा। इसके लिए तीन साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
Sunday, October 11
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