बांग्लादेश के पहेला बैशाख (बंगाली नववर्ष) उत्सव की प्रसिद्ध और यूनेस्को मान्यता प्राप्त परंपरा ‘मंगल शोभायात्रा’ इस साल विवादों में घिर गई है। बांग्लादेश मीडिया (बीडी न्यूज 24) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूदुल हसन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस शोभायात्रा पर स्थायी प्रतिबंध की मांग की है। उन्होंने इसे धार्मिक विश्वासों के खिलाफ और आर्टिफिशियल परंपरा करार देते हुए कहा कि यह आम धार्मिक भावनाओं को आहत करती है और सांप्रदायिक सौहार्द, सार्वजनिक सुरक्षा तथा राष्ट्रीय स्थिरता के लिए खतरा है। याचिका में संस्कृति, धर्म और गृह मंत्रालय के सचिव, ढाका विश्वविद्यालय के उपकुलपति, ढाका के डिप्टी कमिश्नर और फाइन आर्ट्स फैकल्टी के डीन को प्रतिवादी बनाया गया है। महामुदुल हसन का कहना है कि यह शोभायात्रा प्राचीन बंगाली परंपरा नहीं बल्कि 1989 में ‘आनंद शोभायात्रा के नाम से शुरू की गई आधुनिक रचना है। उन्होंने बताया कि पक्षियों, मछलियों और जानवरों के विशाल पुतले लेकर खुशहाली की कामना करना इस्लामी विश्वासों के अनुसार सही नहीं है, क्योंकि मुसलमान केवल अल्लाह से ही आशीर्वाद मांगते हैं।
बांग्लादेश में पहले जब शेख हसीना की सरकार नहीं थी, तब अस्थायी प्रशासन ने ‘मंगल’ शब्द को शोभायात्रा के नाम से हटा दिया था। इसी कड़ी में इस साल के 1433वें बंगाली नववर्ष के लिए ढाका विश्वविद्यालय ने मार्च 30 को घोषणा की कि कार्यक्रम ‘आनंद शोभायात्रा’ के नाम से आयोजित होगा। हालांकि यह शोभायात्रा 2016 में यूनेस्को की मान्यता प्राप्त कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हो चुकी है। नाम बदलने की खबर से सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो गया, और संस्कृति मंत्री निताई रॉय चौधरी ने स्पष्ट किया कि अस्थायी प्रशासन के दौरान नाम बदलने की आवश्यकता नहीं थी और इस वर्ष का आधिकारिक नाम ‘बैशाखी शोभायात्रा’ रखा गया। याचिकाकर्ता अब अदालत से आदेश मांग रहे हैं कि प्रशासन किसी भी रूप में इस शोभायात्रा को आयोजित, अनुमोदित या प्रचारित न करे।

