Sunday, October 11

पीएम मोदी इंडोनेशिया के दौरे पर हैं। आज इंडोनेशिया की सरकार ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया। इसके बाद पीएम मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित किया और दोनों देशों की साझा संस्कृति और विरासत पर बात की। साथ ही भविष्य में दोनों देशों के सहयोग की संभावनाओं पर भी अपने विचार रखे। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, ‘आज सुबह मुझे इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान पाने का भी सम्मान पाने का मौका मिला। मैं इसके लिए कोटि-कोटि भारतीयों की तरफ से इंडोनेशिया को धन्यवाद देता हूं। यह दोनों देशों की लोकतांत्रिक विरासत, साझा संस्कृति का प्रतीक है।’ पीएम मोदी ने कहा, ‘आज भारत और इंडोनेशिया इतिहास के अहम मोड़ पर खड़े हैं। आज इंडोनेशिया की महान धरती से मैं आपके सामने दोनों देशों के साझा विकास का विश्वास व्यक्त करता हूं। भारत, दुनिया का वो देश है, जो विस्तारवाद नहीं विकासवाद की नीति पर चलता है। इसलिए हम भारत में कहते हैं सबका साथ, सबका विकास। आज मैं यही मंत्र, यही भावना लेकर इंडोनेशिया के आप सभी सांसद सदस्यों के बीच आया हूं। दोनों देशों के बीच भले ही सैंकड़ों किलोमीटर की दूरी है, लेकिन दोनों देशों के बीच समुद्र में 150 किलोमीटर की ही दूरी है। भारत और इंडोनेशिया के बीच दूरी का नहीं, बल्कि सेतु का प्रतीक है। ये हमारे साझा भविष्य का केंद्र है।’ ‘इंडिया, एशिया और हिंद महासागर हमारे आपसी जुड़ाव की गवाही देते हैं। हजारों वर्षों तक भारत और इंडोनेशिया के बीच जुड़ाव रहा है। मैं आपसे भारत-इंडोनेशिया के संबंधों को नई ऊंचाई देने की अपील करता हूं। इंडिया और इंडोनेशिया सिर्फ समुद्र ही साझा नहीं करते बल्कि हमारा इतिहास भी साझा करते हैं। हमारा संबंध रामायण काल से है। हमारा संबंध नालंदा, संगीत और नृत्य से है। हम विभिन्न ऐतिहासिक स्मारकों के जरिए जुड़े हैं। हम बाली जात्रा के उत्सव और उसके उल्लास से जुड़े हैं और स्वाद से भी जुड़े हैं।’

भारत के पश्चिमी छोर पर स्थित गुजरात मेरा गृह राज्य है। कहा जाता है कि सदियों से पहले गुजरात से कुछ व्यापारी और सूफी संत समुद्र के रास्ते ही इंडोनेशिया आए थे। वे अपने साथ इस्लाम के विचार और इस्लाम के जीवन मूल्य भी लेकर आए।  आज भी इंडोनेशिया की कला में उनकी छाप दिखाई देती है। इसलिए राष्ट्रपति सुकर्णों ने भी कहा था भारत और इंडोनेशिया के लोग रक्त और संस्कृति के संबंधों से जुड़े हैं। हमलोगों ने लंबे समय तक विदेशी शासन का सामना किया है। हम दोनों देश एक ही समय स्वतंत्र हुए। आजाद देश के तौर पर संप्रभुता की बात आती है तो भारत संयुक्त राष्ट्र में इंडोनेशिया की आजादी की लड़ाई की मजबूत आवाज बना। उस दौर में बीजू पटनायक ने जो भूमिका निभाई। उससे दोनों देश और करीब आए।  पीएम मोदी ने कहा, ‘इसके अलावा हमें जो करीब लाता है वो है हमारा मजबूत लोकतंत्र और विविधता भरा लोकतंत्र। भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र हैं और इंडोनेशिया तीसरा सबसे बड़ा लोकतंत्र है। भारत की तरह इंडोनेशिया में भी सैंकड़ों भाषाएं और परंपरा हैं। हम दोनों ने अपने लोकतंत्र में इस विविधता को अपनी एकता की नींव बनाना है।’

‘1950 में जब भारत ने पहला गणतंत्र दिवस मनाया था, उसमें पहले अतिथि राष्ट्रपति सुकर्णों ही थे। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। हमारे यहां भी पिछले एक दशक में 25 करोड़ से ज्यादा भारतीय गरीबी से बाहर आए हैं। इसलिए जब भारत और इंडोनेशिया साथ खड़े होते हैं तो दुनिया का विश्वास मजबूत होता है कि लोकतंत्र विश्वास देता है और लोकतंत्र भविष्य बनाता है। मुझे अटूट विश्वास है कि हमारी साझा आकांक्षाएं भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।’ भारत में हम विकसित भारत 2047 का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। अपने लक्ष्यों को हासिल करने में हम एक दूसरे के सहयोगी बन सकते हैं। हम दुनिया की सबसे युवा आबादी हैं और दुनिया की तेजी से आगे बढ़ रही बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। हम दोनों बड़ी समुद्री ताकत हैं और हम वैश्विक दक्षिण की आवाज भी हैं। इसी विजन के साथ आज मेरी राष्ट्रपति से विस्तृत चर्चा भी हुई है। भारत और इंडोनेशिया में जो सद्भाव और विश्वास है, हमें उसे अपने नागरिकों के लिए अवसरों में बदलना है।

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