Sunday, October 11

विदेश मंत्री एस जयशंकर अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मुख्यालय में 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत की अस्थाई सीट के लिए अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात करेंगे। जयशंकर ने 5 से 10 जुलाई तक कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान की आधिकारिक यात्रा की। वहींं,  शनिवार को अमेरिका पहुंचने की उम्मीद है। वह सोमवार को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में एक विशेष कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वे 14-15 जुलाई को ब्रुसेल्स में आयोजित होने वाली तीसरी भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद की बैठक में भाग लेंगे और अपने ईयू और बेल्जियम के समकक्षों के साथ बातचीत करेंगे।संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी बैठकों के कार्यक्रम के अनुसार, गुटेरेस सोमवार दोपहर को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में जयशंकर से मुलाकात करेंगे।

भारत आखिरी बार कब बैठक में शामिल हुआ?
भारत आखिरी बार 2021-22 के कार्यकाल के लिए संयुक्त राष्ट्र की बैठक में शामिल हुआ था। 2028-29 के कार्यकाल के लिए चुनाव अगले साल जून में होंगे, जब भारत और ताजिकिस्तान एशिया-प्रशांत समूह श्रेणी में एकमात्र सीट के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के चुनाव ऐसे समय में होंगे जब दुनिया महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक बदलावों से जूझ रही है, क्योंकि विश्व यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और ईरान के खिलाफ अमेरिका-इस्राइल युद्ध जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपनी उम्मीदवारी के लिए भेजे गए संदेश में भारत ने “#India4UNSC 2028-29 शांति, ग्रह, प्रगति” पर प्रकाश डाला है।

भारत सुरक्षा परिषद में सुधार क्यों लाना चाहता है?
भारत सुरक्षा परिषद में सुधार लाने के लिए वर्षों से चल रहे प्रयासों में अग्रणी रहा है, जिसमें इसके स्थायी और अस्थायी दोनों वर्गों का विस्तार शामिल है। भारत का कहना है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की यह परिषद 21वीं सदी के लिए उपयुक्त नहीं है और समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है। दिल्ली ने लगातार इस बात पर जोर दिया है कि वह आर्थिक संतुलन की मेज पर स्थायी स्थान पाने की हकदार है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता की स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार का आह्वान किया है। इसके साथ ही चेतावनी दी है कि अगर केवल इसकी अस्थायी श्रेणी की सदस्यता का विस्तार किया जाता है तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार विफलता के कगार पर होगा, क्योंकि इससे पांच स्थायी सदस्यों की निर्णय लेने की शक्ति संरचना में मौलिक रूप से कोई बदलाव नहीं आएगा।

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