रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शांति की नई कोशिश शुरू होने वाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मॉस्को पहुंच गए हैं। इसके बाद दोनों कीव भी जाएंगे। माना जा रहा है कि उनकी यात्रा से दोनों देशों के बीच रुकी शांति वार्ता को फिर आगे बढ़ाने की कोशिश होगी। इसी बीच रूस के रातभर किए हमलों में यूक्रेन में चार लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए।
राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने हमले रोकने की बात क्यों कही?
यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी दूतों की यात्रा के दौरान यूक्रेन हवाई हमले नहीं करेगा। उन्होंने रूस से भी इसी तरह हमले रोकने की अपील की। वोलोदिमीर जेलेंस्की ने यह भी कहा कि अमेरिकी वार्ताकारों की सुरक्षित यात्रा के लिए रूसी हवाई क्षेत्र सामान्य रूप से काम करता रहे, यह सुनिश्चित किया जाएगा। वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा, ‘हमारी तरफ से कोई हवाई हमला नहीं होगा और रूस को भी ऐसा ही करना चाहिए, ताकि इन वार्ताओं और अमेरिकी यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं के लिए जरूरी समय मिल सके।’ दक्षिणी निप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र में एक औद्योगिक प्रतिष्ठान पर रूसी हमले में चार लोगों की मौत हुई और पांच लोग घायल हुए। निकोपोल जिले में हुए एक अलग हमले में 62 साल का एक व्यक्ति घायल हुआ। कई निजी मकानों और एक अपार्टमेंट इमारत को भी नुकसान पहुंचा।
रूस ने कितने ड्रोन और मिसाइलें दागीं?
यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रात में रोस्तोव और वोरोनेझ क्षेत्रों से बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके साथ ही 167 हमलावर ड्रोन भेजे गए। इनमें शाहेद ड्रोन भी शामिल थे और करीब आधे ड्रोन जेट इंजन से चलने वाले थे। यूक्रेन की वायु रक्षा ने 128 ड्रोन को मार गिराया या दबा दिया। रूस के सीमावर्ती बेलगोरोद क्षेत्र में यूक्रेन के हमलों में तीन लोग घायल हुए। इनमें 14 साल की एक लड़की भी शामिल है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेना ने रात में 53 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए। रूस-यूक्रेन युद्ध को सिर्फ 24 फरवरी 2022 से शुरू हुआ मानना पूरी तस्वीर नहीं बताता। इसकी जड़ 2014 में है, जब यूक्रेन में राजनीतिक संकट के बाद रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर उसे अपने में मिला लिया। इसके बाद पूर्वी यूक्रेन के डोनेत्स्क और लुहांस्क में रूस समर्थित
अलगाववादियों और यूक्रेनी सेना के बीच लड़ाई शुरू हुई। यह संघर्ष वर्षों तक चलता रहा। 2021 के अंत तक तनाव और बढ़ गया। रूस ने यूक्रेन की सीमा के पास बड़ी संख्या में सैनिक तैनात किए। रूस ने साफ-साफ कहा था कि नाटो में यूक्रेन को शामिल नहीं होना चाहिए। बातचीत से समाधान नहीं निकला। इसके बाद 24 फरवरी 2022 को रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य हमला शुरू कर दिया। रूस ने इसे यूक्रेन को ‘निरस्त्रीकरण’ और ‘नाजीवाद से मुक्ति’ दिलाने की कार्रवाई बताया, जबकि यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगियों ने इसे आक्रमण माना। आज भी विवाद के केंद्र में यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता, कब्जाए गए इलाकों पर नियंत्रण, सुरक्षा और नाटो से जुड़ा सवाल है। रूस जिन इलाकों पर अपना दावा करता है, यूक्रेन उन्हें अपनी जमीन मानता है और उन्हें रूस को सौंपने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि युद्ध खत्म करने को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाना बेहद मुश्किल बना हुआ है।

