कौन ऐसा है जो लंबी उम्र नहीं चाहता, नहीं चाहता है कि 100 साल तक जिए? पर जिस तरह से हमारी लाइफस्टाइल और खान-पान की आदतें गड़बड़ होती जा रही हैं ये चाहत ज्यादातर लोगों के लिए बस चाहत बनकर ही रह जाती है। दुनियाभर में क्रॉनिक बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ता जा रहा है, बुजुर्ग तो बुजुर्ग कम उम्र के लोग भी डायबिटीज, हृदय रोग और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में लंबी उम्र, विशेषकर लंबी और स्वस्थ जिंदगी पाना क्या वास्तव में आसान है? इस विषय को लेकर स्वास्थ्य विशेष अब भी बहुत आशावान हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हम अपनी डाइट में समय रहते सुधार कर लें और दिनचर्या को ठीक रख लें तो सौ साल तक जीना इतना भी मुश्किल नहीं है। जब बात डाइट की आती है तो लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि कौन सी डाइट सबसे फायदेमंद है? शाकाहारी या मांसाहारी। किस तरह के आहार को फॉलो करके हम लंबी आयु प्राप्त कर सकते हैं? इस संबंध में वैज्ञानिकों की एक टीम ने बड़ा खुलासा किया है। आइए जानते हैं। मौजूदा समय में बढ़ती बीमारियों, स्ट्रेस और गलत खान-पान के कारण लोगों की उम्र भी कम होती जा रही है। शोध से पता चलता है कि लंबी उम्र का सीधा संबंध हमारी डाइट, खाने की आदतों और पोषण संतुलन से है। कई अध्ययन दावा करते रहे हैं कि शाकाहारी या प्लांट-बेस्ड डाइट का सेवन करने वाले लोगों की उम्र लंबी हो सकती है। हालांकि इसके उलट एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने कहा है कि अगर आप 100 साल तक जीने की इच्छा रखते हैं तो नॉनवेज जरूर खाएं। अध्ययन से पता चला है कि मांसाहार खाने वालों के 100 साल तक जीने की संभावना ज्यादा होती है, पर इसका मतलब ये भी नहीं है कि आप पूरी तरह से मांसाहार पर ही निर्भर हो जाएं।

ये अध्ययन चीन में किया गया है। चीन की फुडान यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. जियांग गाओ कहते हैं, हमारी शोध से पता चलता है कि लंबे समय तक जीने के लिए हमें तमाम प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जो हमें बीमारियों से बचाएं और असमय मृत्य के खतरे को कम करें। सिर्फ शाकाहारी खाने के बजाय, पौधे और मांस दोनों से मिलने वाले पोषक तत्व हमारी अच्छी सेहत के लिए जरूरी होते हैं। 80 साल और उससे अधिक उम्र के वयस्कों में हमने देखा कि जिनकी डाइट में ये दोनों शामिल थे उनके 100 साल के माइलस्टोन तक पहुंचने की संभावना अधिक थी। चाइनीज लॉन्गीट्यूडिनल हेल्दी लॉन्गेविटी सर्वे के लिए विशेषज्ञों ने 5,203 प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। साल 1998 में सर्वे शुरू होने पर सभी 80 साल या उससे ज्यादा उम्र के थे। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की स्वास्थ्य जानकारी का विश्लेषण किया ताकि यह देखा जा सके कि डाइट का 100 साल तक जीने की संभावना पर कितना असर पड़ता है। इस ग्रुप में से 1,495 लोग 100 साल तक जीवित रहे, जबकि 3,744 लोग 100 साल के होने से पहले ही मर गए। जिन प्रतिभागियों ने पूरे अध्ययन के दौरान अपने खाने में मांसाहार को शामिल रखा, उनके 100 साल तक जीने की संभावना ज्यादा थी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको अपनी लाइफ एक्सपेक्टेंसी बढ़ाने के लिए पूरी तरह से मांसाहारी डाइट अपना लेनी चाहिए। जो लोग रोजाना प्लांट बेस्ड डाइट खाते थे, उनके 100 साल तक जीने की संभावना उन लोगों की तुलना में 84 प्रतिशत थी। हालांकि, शोधकर्ताओं ने पाया कि डाइट हर व्यक्ति की उम्र पर एक जैसा असर नहीं डालती। सबकी सेहत के हिसाब से जरूरतें भी अलग-अलग हो सकती हैं।
शाकाहारी डाइट के अपने फायदे
विशेषज्ञों ने बताया, जिन शाकाहारी लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) उनकी उम्र के हिसाब से हेल्दी था, उनके भी 100 साल तक जीने की संभावना थी। ज्यादा वजन वाले प्रतिभागियों के लिए भी, डाइट का उनके जीवित रहने की संभावना पर कोई खास असर नहीं पड़ा। हालांकि, अंडरवेट ग्रुप के लोगों में रोजाना मांसाहार खाने से 100 साल की उम्र तक पहुंचने की संभावना 44 प्रतिशत अधिक पाई गई। द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में प्रकाशित अध्ययन में डॉ. जियांग गाओ लिखते हैं, जानवरों और पौधों से मिलने वाले पोषक तत्व दोनों ही हमारे लिए जरूरी हैं। शाकाहारी डाइट बेहतर कार्डियोवैस्कुलर स्वास्थ्य के लिए अच्छी मानी जाती है। पर 80 से ज्यादा उम्र के जिन लोगों की बीएमआई कम थी, अगर वह मांस खाना बिल्कुल कम कर देते हैं या फिर जो शाकाहारी लोग हैं उनके 100 तक पहुंचने में काफी दिक्कतें आ सकती हैं।
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