दिनचर्या की गड़बड़ी और खान-पान ठीक न रहने के कारण कई तरह की बीमारियां कम उम्र में ही लोगों को अपना शिकार बनाती जा रही हैं। पाचन से जुड़ी समस्याएं इसका प्रमुख उदाहरण हैं। पाचन ठीक रहने को स्वस्थ शरीर का आईना माना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर पाचन तंत्र सही से काम नहीं करता तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। अक्सर पेट में बनी रहने वाली समस्याओं और पाचन तंत्र के ठीक से काम न करने के कारण भोजन से मिलने वाले पोषक तत्व ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते। बार-बार पेट खराब रहना, खाना खाने के बाद बेचैनी या जलन महसूस होना और सुबह पेट साफ न होना, ये सभी संकेत बताते हैं कि आपका पाचन तंत्र कमजोर हो रहा है। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट्स की मानें तो लंबे समय तक बनी रहने वाली पेट की समस्याएं जैसे दर्द या ऐंठन की दिक्कत को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार ये पाचन विकारों से कहीं ज्यादा क्रोहन डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, क्रोहन डिजीज के मामले युवाओं में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।
क्रोहन रोग एक प्रकार का क्रॉनिक इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी) है।
- इस रोग के कारण पाचन तंत्र में कहीं भी सूजन पैदा हो सकती है। ये अक्सर छोटी आंत और बड़ी आंत को प्रभावित करती है।
- कई बार सूजन की समस्या आंत की गहरी परतों तक फैल जाती है, जिसके कारण पाचन में गड़बड़ी और पेट दर्द की दिक्कत हो सकती है।
- क्रोहन रोग के कारण पेट में अक्सर तेज दर्द तो रहता ही है साथ ही इसके कारण शरीर तेजी से कमजोर भी होने लग जाता है।
क्यों होती है ये बीमारी?
क्रोहन रोग होने का सही कारण अभी भी पता नहीं चल पाया है। हालांकि विशेषज्ञ डाइट और स्ट्रेस की समस्या को इसके लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार मानते हैं। अध्ययनों में कुछ अन्य स्थितियों को भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार बताया गया है।
- 200 से ज्यादा जीन क्रोहन रोग से जुड़े हुए पाए गए हैं। इस तरह के एक या उससे अधिक जीन होने से किसी व्यक्ति को क्रोहन रोग होने की आशंका रहती है।
- बैक्टीरिया, वायरस या अन्य पर्यावरणीय कारक भी क्रोहन रोग को ट्रिगर कर सकते हैं।
- जिन लोगों के माता-पिता या किसी करीबी को ये समस्या रही है उनमें भी क्रोहन रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
- इसके अलावा धूम्रपान की आदत को क्रोहन रोग होने का सबसे महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आप क्रोहन डिजीज से पूरी तरह से बचाव नहीं कर सकते, लेकिन धूम्रपान छोड़ने, तनाव को मैनेज करने, नियमित व्यायाम आदि की मदद से इस बीमारी के खतरे को कम जरूर कर सकते हैं। हाई-फाइबर और संतुलित आहार जैसे मेडिटेरेनियन डाइट अपनाकर भी इस रोग के जोखिमों को कम किया जा सकता है।
- डॉक्टर रोजाना खूब मात्रा में पानी और तरल पदार्थों के सेवन की सलाह देते हैं।
- शराब और कैफीन वाले पेय आपकी आंतों के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाले माने जाते हैं। इनसे दूरी बनाने की सलाह दी जाती है।
- ज्यादा तनाव लेने वाले लोगों में क्रोहन रोग होने का खतरा अधिक होता है, इसलिए स्ट्रेस को कम करना भी बहुत जरूरी है।


