फ्रांस, न्यूजीलैंड, सेशेल्स, मलेशिया, स्लोवाकिया, इटली और अब उज्बेकिस्तान किर्गिस्तान… बीते एक वर्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तूफानी रफ्तार से दुनियाभर के 20 देशों के दौरे किए हैं, उसकी प्रकृति अतीत के कूटनीतिक दौरों से बिल्कुल जुदा है। ये दौरे अब संयुक्त घोषणापत्र जारी करने का मंच भर नहीं रह गए हैं बल्कि इस दौरान वॉल स्ट्रीट के बैंकरों के बीच बंद कमरों में होने वाले पक्के समझौतों की तरह रणनीतिक सौदों पर मुहर लगती है। भारत की यह रणनीति अमेरिका पर निर्भरता घटाने के लिए दुनियाभर में नए साझीदार बनाने पर केंद्रित है।
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