अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में ऊर्जा की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है। बढ़ती महंगाई, घटते विदेशी मुद्रा भंडार और तेजी से गिरती मुद्रा के कारण पाकिस्तान पहले से ही गंभीर संकट में है। इंडिया नैरेटिव के एक लेख के अनुसार, यह झटका केवल अस्थायी नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए एक संरचनात्मक आघात है। लेख में कहा गया है कि पाकिस्तान उपमहाद्वीप में अमेरिका-ईरान युद्ध का प्राथमिक शिकार है। पाकिस्तान का साप्ताहिक पेट्रोलियम आयात बिल 30 करोड़ डॉलर से बढ़कर 80 करोड़ डॉलर हो गया है, जो 167 फीसदी की वृद्धि है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से माल ढुलाई लागत और बीमा प्रीमियम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं। यह ऊर्जा झटका पाकिस्तान की वृहद अर्थव्यवस्था में फैल रहा है, जिससे बढ़ती महंगाई, चालू खाता घाटा, विदेशी मुद्रा भंडार में कमी और मुद्रा का अवमूल्यन हो रहा है। कराची बंदरगाह पर भी लॉजिस्टिक्स संकट बढ़ रहा है।
- बोले-आठ बार युद्ध रोकने के लिए मिलना चाहिए था नोबेल;भारत-पाकिस्तान पर किया ये दावा
- अजिंक्य रहाणे भी इम्पैक्ट प्लेयर नियम के विरोध में उतरे, हटाने की मांग; क्या बताया कारण?
- क्यों टला रणबीर कपूर की फिल्म का कार्यक्रम? रिलीज होने वाला था नया गाना; ये कलाकार होने वाले थे शामिल
- आकाशवाणी भवन के पास पुलिस पर पथराव, दो जवान घायल; करीब 500 लोग हिरासत में
- अब ज्यादा सटीक होगी देश में जीडीपी की तस्वीर; दूध-घी से हवाई सफर तक का खर्च भी जुड़ेगा?
- दादी के अंतिम संस्कार में शामिल होने पर संशय; गांव कब पहुंच पाएंगे अभिजीत?
- कुछ घंटे पहले माइक्रोसॉफ्ट पर हुई थी कार्रवाई; क्या है पूरा मामला?
- माइक्रोफाइनेंस में पहले बचत और बीमा, फिर कर्ज; सीईए ने क्यों दी बार-बार संकट की चेतावनी?

