अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तुर्किए में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन से लौटते समय कतर द्वारा उपहार में दिए गए नए विमान के बजाय पुराने एयर फोर्स वन से अमेरिका रवाना हुए, जिससे सभी हैरान रह गए। यह बदलाव ऐसे समय हुआ, जब अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर हवाई हमलों का सिलसिला शुरू हो गया है। ट्रंप ने इस बदलाव को लेकर अधिक स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उन्होंने केवल इतना कहा कि वह पुराने दिनों की याद में पुराने विमान से यात्रा करना चाहते थे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों विमान अमेरिका लौटने से पहले ब्रिटेन स्थित रॉयल एयर फोर्स मिल्डेनहॉल एयरबेस पर रुकेंगे। इस एयरबेस का इस्तेमाल अमेरिकी सैनिक भी करते हैं।
नए विमान में सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
ट्रंप की यात्रा में इस बदलाव ने नए विमान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका ने इस विमान को राष्ट्रपति के उपयोग के अनुरूप हिसाब से तैयार करने पर लगभग 40 करोड़ अमेरिकी डॉलर खर्च किए हैं। विमान के सार्वजनिक होने के बाद सामने आई तस्वीरों से संकेत मिला है कि इसमें पुराने एयर फोर्स वन विमानों जैसी कुछ मिसाइल पहचान और मिसाइल-रोधी सुरक्षा प्रणालियां मौजूद नहीं हैं। यह बदलाव ऐसे समय सामने आया, जब इससे एक दिन पहले ही अमेरिकी सेना ने होर्मुज में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे। ईरान की सीमा तुर्किए से लगती है।
ट्रंप बोले- ईरान मुझे मारना चाहता है
बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या सुरक्षा कारणों से उन्होंने विमान बदला? तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि ईरान जिन लोगों को मारना चाहता है, उस सूची में मैं नंबर एक हूं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्टीवन च्यूंग ने बयान में कहा, ‘नया एयर फोर्स वन अत्याधुनिक विमान है, जिसमें राष्ट्रपति और उनके स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल लगाए गए हैं। जैसा कि राष्ट्रपति हाल में कह चुके हैं, अमेरिका के कई दुश्मनों की नजर उन पर है और इन खतरों से निपटने के लिए हम अपने पास उपलब्ध हर उपाय अपनाते हैं, जिनमें ध्यान भटकाने और भ्रम पैदा करने जैसी रणनीतियां भी शामिल हैं।’ ईरान के पास ऐसी कई मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं, जिनकी मारक क्षमता उसकी सीमा से तुर्किये तक की लगभग 1,300 किलोमीटर दूरी तय करने के लिए पर्याप्त है। इनमें उसके शाहेद ड्रोन और शाहाब बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं। हालांकि, सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार, ईरान के पास ऐसी क्षमता वाले हथियार नहीं हैं, जो लगभग 4,000 किलोमीटर (करीब 2,500 मील) दूर स्थित इंग्लैंड पर प्रभावी हमला कर सकें।
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