बाल झड़ने और गंजेपन की चिंता के बीच देश में करीब 17 हजार करोड़ रुपये का हेयर-केयर बाजार खड़ा हो गया है। इसी बाजार में 48 घंटे में बाल झड़ना रोकने, 90 दिन में नए बाल उगाने और गारंटी के साथ नतीजे देने वाले उत्पादों की भरमार है। तेल, सीरम और शैंपू से लेकर टैबलेट और हेयर ग्रोथ किट तक के दावे सोशल मीडिया पर किए जा रहे हैं। लेकिन कई दावों के समर्थन में पर्याप्त चिकित्सकीय प्रमाण नहीं हैं। भारतीय विज्ञापन मानक परिषद (एएससीआई) की 2025-26 की समीक्षा में व्यक्तिगत देखभाल श्रेणी के 639 मामलों की जांच हुई। इनमें करीब 90 फीसदी विज्ञापनों में बदलाव की जरूरत पाई गई। तेजी से परिणाम, गारंटी और दिखने वाले नतीजों के दावे प्रमुख आपत्तियां रहे। करीब 45 फीसदी मामले इन्फ्लुएंसर विज्ञापनों से जुड़े थे।
हेयर ट्रीटमेंट और ट्रांसप्लांट के दावों से परेशान उपभोक्ताओं के मामले आयोगों तक पहुंचे हैं। अहमदाबाद के एक उपभोक्ता ने उपचार पर 53 हजार रुपये खर्च किए। अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने पर आयोग ने रकम नौ फीसदी ब्याज के साथ लौटाने और 40 हजार रुपये मुआवजे का आदेश दिया। बंगलूरू के एक मामले में 55 हजार रुपये लेकर ट्रांसप्लांट के बजाय विग देने की शिकायत भी सामने आई।
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